दूसरों की कमियों पर नहीं, अपनी जिंदगी पर ध्यान दें : एक प्रेरणादायक नजरिया
दूसरों की कमियों पर नहीं, अपनी जिंदगी पर ध्यान दें : एक प्रेरणादायक नजरिया

लेखक परिचय
डॉ. जे. वी. रामटेके
एसोसिएट प्रोफेसर, सेठ केसरीमल पोरवाल कॉलेज, कामठी
शिक्षा, खेलकूद और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. रामटेके एक प्रख्यात लेखक और विचारक हैं। उनके लेख विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और ऑनलाइन मंचों पर नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं, जो पाठकों को जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
डॉ. रामटेके का मानना है, “हमें दूसरों की कमियों और नकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अपनी आंतरिक प्रगति और सकारात्मक विकास पर ध्यान देना चाहिए।” यह विचार उनकी लेखनी का मूल आधार है, जो इस लेख में भी झलकता है।
दूसरों की कमियों पर समय बर्बाद क्यों?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद को दूसरों की कमियों और गलतियों की आलोचना में उलझा हुआ पाते हैं। हम घंटों सोचते हैं कि फलां व्यक्ति ने ऐसा क्यों किया, या उसकी यह आदत कितनी गलत है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इस प्रक्रिया में हम अपनी कितनी कीमती ऊर्जा और समय बर्बाद कर देते हैं? प्रसिद्ध दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु ओशो ने ठीक ही कहा था, “जब हम दूसरों की बुराइयों के बारे में सोचते हैं, तो हम अनजाने में अपनी आत्मा को खोखला कर लेते हैं।”
यह लेख आपको एक नए दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करता है। यह बताता है कि दूसरों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय हमें अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने, अपने लक्ष्यों को हासिल करने और अपनी आत्मिक शांति को प्राथमिकता देने की जरूरत है। आइए, इस विचार को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि कैसे हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।
नकारात्मकता का चक्र : एक अनावश्यक बोझ
जब हम किसी की बुराई करते हैं या उसकी कमियों पर ध्यान देते हैं, तो हम अनजाने में अपने दिमाग को नकारात्मकता से भर लेते हैं। यह नकारात्मकता एक चक्र की तरह काम करती है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके सहकर्मी ने आपके साथ कोई गलत व्यवहार किया। आप उस घटना को बार-बार याद करते हैं, उस पर गुस्सा करते हैं, और शायद अपने दोस्तों से उसकी शिकायत भी करते हैं। इस प्रक्रिया में आप न केवल अपना समय बर्बाद करते हैं, बल्कि अपनी मानसिक शांति को भी खो देते हैं।
डॉ. रामटेके कहते हैं, “किसी की बुराई उसकी अपनी समस्या है, आपकी नहीं।” अगर कोई व्यक्ति आपके साथ गलत करता है, तो यह उसकी मानसिकता को दर्शाता है, न कि आपकी कीमत को। ऐसे में उसकी नकारात्मकता पर प्रतिक्रिया देना आपको उसी दलदल में खींच लेता है। इसके बजाय, हमें अपनी ऊर्जा को बचाना चाहिए और उसे उन चीजों में लगाना चाहिए जो हमें बेहतर बनाती हैं।
ओशो का एक सुंदर उदाहरण इस संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है। वे कहते हैं, “जब कोई आपके पास आग लेकर आए, तो आप पत्थर बन जाएं। वह आग आपको कभी नहीं जला पाएगी।” यहाँ पत्थर का मतलब है अपनी मानसिक शक्ति और संयम। अगर हम दूसरों की नकारात्मकता को अपने अंदर प्रवेश करने से रोक लें, तो हम अपनी शांति और ऊर्जा को बचा सकते हैं।
ध्यान : आपकी सबसे बड़ी ताकत
ध्यान हमारी सबसे कीमती संपत्ति है। यह वह शक्ति है जो हमारे विचारों, भावनाओं और कार्यों को दिशा देती है। लेकिन अगर हम अपना ध्यान दूसरों की कमियों पर केंद्रित करते हैं, तो हम इस शक्ति को गलत दिशा में मोड़ देते हैं। नतीजा? हम उसी नकारात्मकता की छाया बन जाते हैं, जिससे हम बचना चाहते हैं।
डॉ. रामटेके बताते हैं, “ध्यान एक ऐसी ऊर्जा है जो आपके जीवन को बदल सकती है। अगर आप इसे अपने सपनों, लक्ष्यों और आत्मिक विकास पर लगाते हैं, तो यह आपको अनंत संभावनाओं की ओर ले जाती है।” उदाहरण के लिए, अगर आप एक लेखक बनना चाहते हैं, तो अपने समय का उपयोग दूसरों की आलोचना में करने के बजाय, हर दिन कुछ समय लिखने में लगाएं। अगर आप एक बेहतर इंसान बनना चाहते हैं, तो अपनी कमियों को सुधारने पर ध्यान दें।
ध्यान को सही दिशा में लगाने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव:
हर दिन अपने लक्ष्यों की समीक्षा करें: सुबह 10 मिनट निकालकर यह सोचें कि आप आज क्या हासिल करना चाहते हैं। यह आपके दिमाग को सकारात्मक दिशा में ले जाएगा।
नकारात्मक विचारों को पहचानें: जब भी आप खुद को किसी की आलोचना करते हुए पाएं, रुकें और पूछें, “क्या यह मेरे लिए जरूरी है?”
ध्यान और मेडिटेशन का अभ्यास करें: रोजाना 5-10 मिनट का ध्यान आपको अपने विचारों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
समय : जीवन का सबसे कीमती रत्न
“समय ही जीवन है,” यह कथन हम सभी ने सुना है, लेकिन क्या हम वाकई इसे समझते हैं? समय वह संसाधन है जो एक बार चला गया, तो कभी वापस नहीं आता। फिर भी, हम इसे दूसरों की कमियों पर सोचने, उनकी आलोचना करने या पुरानी बातों को याद करने में बर्बाद कर देते हैं।
सोचिए, जिन लोगों की बुराई आप करते हैं, क्या वे आपके बारे में इतना सोचते हैं? शायद नहीं। तो फिर आप क्यों अपना कीमती समय उन पर बर्बाद कर रहे हैं? डॉ. रामटेके कहते हैं, “अपने समय को उन चीजों में निवेश करें जो आपको बेहतर बनाती हैं। किताबें पढ़ें, नई स्किल सीखें, अपने परिवार के साथ समय बिताएं, या अपने शौक को पूरा करें।”
एक छोटा सा प्रयोग करें : अगली बार जब आप किसी की बुराई करने या उसकी गलतियों पर सोचने लगें, तो रुकें। एक गहरी सांस लें और खुद से पूछें, “मैं इस समय का उपयोग अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने में कैसे कर सकता हूँ?” हो सकता है कि आप उस समय में एक नया लेख लिख लें, कोई नई रेसिपी आजमा लें, या अपने बच्चों के साथ हंसी-मजाक करें। यह छोटा बदलाव आपके जीवन में बड़ा अंतर ला सकता है।
खुद को नकारात्मकता से बचाएं
हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि हम अपने मन और आत्मा को दुनिया की नकारात्मकता से बचाएं। यह दुनिया चुनौतियों और नकारात्मकता से भरी पड़ी है। हर दिन हमें कोई न कोई ऐसी बात सुनने को मिलती है जो हमें परेशान कर सकती है। लेकिन क्या हम हर बार उसका जवाब देना चाहेंगे? नहीं।
डॉ. रामटेके का कहना है, “अपनी मानसिक शांति की रक्षा करना आपका कर्तव्य है।” इसके लिए हमें एक मजबूत मानसिक कवच बनाना होगा। यह कवच बनता है आत्म-जागरूकता, संयम और सकारात्मक सोच से। जब कोई आपको गलत बोलता है या आपकी आलोचना करता है, तो उसे अनदेखा करने की ताकत रखें। यह आसान नहीं है, लेकिन अभ्यास के साथ आप इसे सीख सकते हैं।
कुछ व्यावहारिक उपाय : सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताएं : ऐसे लोग जो आपको प्रेरित करते हैं, उनके साथ समय बिताएं।
नकारात्मक खबरों से दूरी बनाएं : टीवी, सोशल मीडिया या अखबारों में नकारात्मक खबरें देखने से बचें।
आभार व्यक्त करें: हर दिन उन चीजों की लिस्ट बनाएं जिनके लिए आप आभारी हैं। यह आपके दिमाग को सकारात्मकता से भर देगा।
आप ही अपने जीवन के नायक हैं
अंत में, यह याद रखें कि आपकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति आप खुद हैं। आपकी खुशी, आपकी प्रगति और आपकी शांति आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। दूसरों की कमियों पर ध्यान देने से न तो आपका भला होगा, न ही दुनिया बदलेगी। लेकिन अगर आप अपने ध्यान को अपनी बेहतरी पर लगाते हैं, तो आप न केवल खुद को बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी प्रेरित कर सकते हैं।
डॉ. रामटेके का यह संदेश बेहद सशक्त है: “अपनी जिंदगी को संवारें, दूसरों की कमियों को भूल जाएं।” यह एक ऐसा मंत्र है जो हमें नकारात्मकता के चक्र से बाहर निकाल सकता है और हमें एक सकारात्मक, सार्थक और खुशहाल जीवन की ओर ले जा सकता है।
तो आज से यह संकल्प लें कि आप अपना समय, ध्यान और ऊर्जा केवल उन चीजों पर लगाएंगे जो आपको बेहतर बनाती हैं। दूसरों की कमियों को छोड़ दें, और अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दें। क्योंकि, जैसा कि ओशो ने कहा, “वो बुरा है… तुम अपनी फिक्र करो।”
